कानपुर, 17 जुलाई 2025: कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पद को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रसाद सिंह ने डॉ. हरिदत्त नेमी का निलंबन आदेश रद्द कर दिया है, जिसके बाद वे अब कानपुर के सीएमओ बने रहेंगे। वहीं, वर्तमान सीएमओ डॉ. उदयनाथ को उनके पद से हटाकर श्रावस्ती वापस भेज दिया गया है।
घटनाक्रम: निलंबन से वापसी तक
27 दिन पहले, डॉ. हरिदत्त नेमी को निलंबित कर लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था, और डॉ. उदयनाथ को कानपुर का कार्यभार सौंपा गया था। इसके विरोध में डॉ. हरिदत्त नेमी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच गए। हाईकोर्ट ने डॉ. हरिदत्त नेमी के निलंबन पर रोक लगा दी।
न्यायालय के आदेश के बाद डॉ. हरिदत्त नेमी कानपुर स्थित सीएमओ कार्यालय पहुंचे और कुर्सी पर बैठ गए। इसके बाद दो दिनों तक कार्यालय में काफी हंगामा चला और अंततः कानपुर पुलिस ने डॉ. हरिदत्त नेमी को कार्यालय से बाहर निकाल दिया था।
अवमानना याचिका और सरकार का यू-टर्न
सोमवार को डॉ. हरिदत्त नेमी ने अपने निलंबन के खिलाफ एक बार फिर न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की, जिस पर 17 जुलाई को सुनवाई तय की गई थी। इसके बाद राज्य सरकार बैकफुट पर आ गई। स्वास्थ्य विभाग के सचिव द्वारा निलंबन रद्द करने का निर्देश जारी कर दिया गया।
हाईकोर्ट में उठाया गया मुद्दा: स्टे के बावजूद हटाने का आरोप
डॉ. हरिदत्त नेमी ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सरकार के फैसले के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के स्टे आदेश के बावजूद उन्हें जबरन उनके पद से हटाया गया। यह याचिका 14 जुलाई 2025 को दाखिल की गई थी और 15 जुलाई को पंजीकृत हुई।
याचिकाकर्ता डॉ. हरिदत्त नेमी ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, डीएम कानपुर, एडीएम, एसीपी, थाना चकेरी एसएचओ और तत्कालीन सीएमओ कानपुर को पार्टी बनाया था। डॉ. नेमी के अधिवक्ता लालता प्रसाद मिश्रा ने कहा कि स्टे आदेश के बावजूद अधिकारियों ने स्थानांतरण को लागू किया, जो पूरी तरह से न्यायालय के आदेश की अवमानना है और न्यायिक आदेशों के सम्मान का प्रश्न है।
डीएम द्वारा निलंबन और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
कानपुर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने 18 जून को सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी को निलंबित कर दिया था। इसके बाद हरिदत्त नेमी ने अपने निलंबन के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकलपीठ ने 8 जुलाई को उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी और राज्य सरकार व विपक्षी से 4 हफ्ते में जवाब मांगा था।
डॉ. हरिदत्त नेमी का तर्क था कि बिना किसी विभागीय जांच के उन्हें निलंबित कर दिया गया, जबकि डॉ. उदयनाथ को सीएमओ बनाया गया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि निलंबन के समय कोई जांच कार्यवाही नहीं की गई थी, और जिस आरोप में निलंबन किया गया, वह इतना बड़ा दंड देने योग्य नहीं था। न्यायालय ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन व अपील) नियमावली के तहत उन्हें निलंबित नहीं किया जा सकता था।
सीएमओ हरिदत्त नेमी की दोबारा एंट्री से हुआ था हंगामा
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 9 जुलाई की सुबह 9:30 बजे हुई थी, जब डॉ. हरिदत्त नेमी कार्यालय पहुंचे और सीधे अपनी कुर्सी पर बैठ गए। इसी बीच 10 बजे डॉ. उदयनाथ भी कार्यालय पहुंचे। डॉ. नेमी ने डॉ. उदयनाथ को बताया कि उनके पास स्टे ऑर्डर है, और उन्हें अपनी पुरानी जॉइनिंग वाली जगह पर वापस जाना होगा। उन्होंने डॉ. उदयनाथ को शासन से बात करने की सलाह भी दी।
डीएम-सीएमओ विवाद की जड़
यह विवाद 5 फरवरी, 2025 को शुरू हुआ, जब कानपुर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने सीएमओ कार्यालय पर छापा मारा था। इस दौरान सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी सहित 34 अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए थे। डीएम ने सीएमओ कार्यालय से एक वीडियो जारी कर बताया था कि रजिस्टर में नाम होने के बावजूद 34 अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय में नहीं मिले, जिसके बाद सभी का एक दिन का वेतन रोक दिया गया था।
इस कार्रवाई के बाद से डीएम और सीएमओ के बीच तनातनी शुरू हो गई थी। इससे पहले भी डीएम लगातार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) का दौरा कर कमियां उजागर कर रहे थे। यह मामला तब और बढ़ गया जब डीएम के निर्देश के बावजूद सीएमओ ने लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

5 फरवरी को सीएमओ कार्यालय पर डीएम ने छापा मारा था। उस समय सीएमओ समेत 34 अधिकारी-कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे।





