कानपुर में विकास की बात तो बहुत होती है, लेकिन अग्निहोत्री नगर, मकड़ी खेड़ा की हालत कुछ और ही कहानी बयां करती है। यहाँ के निवासी पिछले कई सालों से जलभराव और टूटी सड़कों से परेशान हैं। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद कोई भी नेता उनकी सुध लेने नहीं आया।
जलभराव और बीमारियों का खतरा

अग्निहोत्री नगर में बारिश के मौसम में गलियाँ तालाब बन जाती हैं। इसका मुख्य कारण जल निकासी की सही व्यवस्था और नालियों का न होना है। इस जलभराव की वजह से मच्छर पनप रहे हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और दूसरी बीमारियाँ फैलने का खतरा बढ़ गया है। निवासियों का कहना है कि जब तक सड़कें पक्की नहीं होंगी, नालियाँ नहीं बन सकतीं और ये दोनों काम सालों से रुके हुए हैं। लोगों ने बताया कि पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार में कुछ काम हुए थे, लेकिन बीजेपी सरकार के पिछले 10 साल में कोई भी बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ।
जनप्रतिनिधियों पर अनदेखी का आरोप
यहाँ के लोगों ने सांसद देवेंद्र भोले, महापौर प्रमिला पांडेय, नगर आयुक्त सुधीर कुमार और विधायिका नीलिमा कटियार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। निवासियों का कहना है कि कई बार फोन पर समस्याएँ बताने के बाद भी किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। ख़ासकर, विधायिका नीलिमा कटियार को लेकर लोगों में बहुत गुस्सा है, क्योंकि उन्होंने कभी क्षेत्र का दौरा नहीं किया और न ही लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश की।

इससे भी ज़्यादा निराशा तब हुई, जब वार्ड 17 के पार्षद पति संजय बाथम ने एक निवासी से सीधे तौर पर कहा कि “आपकी अग्निहोत्री नगर सोसाइटी है, वहाँ कोई विकास कार्य नहीं होगा।” ऐसे बयान ने लोगों की उम्मीदों को पूरी तरह से तोड़ दिया है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और सरकार से जल्द से जल्द इस क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान देने की गुहार लगाई है, ताकि उन्हें जलभराव से छुटकारा मिल सके और वे एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सकें।
अग्निहोत्री नगर, मकड़ी खेड़ा में जलभराव और जर्जर सड़कों की समस्या
कानपुर में विकास की बात तो बहुत होती है, लेकिन अग्निहोत्री नगर, मकड़ी खेड़ा की हालत कुछ और ही कहानी बयां करती है। यहाँ के निवासी पिछले कई सालों से जलभराव और टूटी सड़कों से परेशान हैं। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद कोई भी नेता उनकी सुध लेने नहीं आया।
जलभराव और बीमारियों का खतरा

अग्निहोत्री नगर में बारिश के मौसम में गलियाँ तालाब बन जाती हैं। इसका मुख्य कारण जल निकासी की सही व्यवस्था और नालियों का न होना है। इस जलभराव की वजह से मच्छर पनप रहे हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया और दूसरी बीमारियाँ फैलने का खतरा बढ़ गया है। निवासियों का कहना है कि जब तक सड़कें पक्की नहीं होंगी, नालियाँ नहीं बन सकतीं और ये दोनों काम सालों से रुके हुए हैं। लोगों ने बताया कि पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार में कुछ काम हुए थे, लेकिन बीजेपी सरकार के पिछले 10 साल में कोई भी बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ।
जनप्रतिनिधियों पर अनदेखी का आरोप
यहाँ के लोगों ने सांसद देवेंद्र भोले, महापौर प्रमिला पांडेय, नगर आयुक्त सुधीर कुमार और विधायिका नीलिमा कटियार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। निवासियों का कहना है कि कई बार फोन पर समस्याएँ बताने के बाद भी किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। ख़ासकर, विधायिका नीलिमा कटियार को लेकर लोगों में बहुत गुस्सा है, क्योंकि उन्होंने कभी क्षेत्र का दौरा नहीं किया और न ही लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश की।
इससे भी ज़्यादा निराशा तब हुई, जब वार्ड 17 के पार्षद पति संजय बाथम ने एक निवासी से सीधे तौर पर कहा कि “आपकी अग्निहोत्री नगर सोसाइटी है, वहाँ कोई विकास कार्य नहीं होगा।” ऐसे बयान ने लोगों की उम्मीदों को पूरी तरह से तोड़ दिया है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और सरकार से जल्द से जल्द इस क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान देने की गुहार लगाई है, ताकि उन्हें जलभराव से छुटकारा मिल सके और वे एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सकें।






