उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर, यह कानपुर के निवासियों द्वारा सामना की जा रही नागरिक समस्याओं और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों – महापौर, नगर आयुक्त, पार्षद, विधायक और सांसद – की कथित निष्क्रियता के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट है।

Photo: acinews24

कानपुर की नागरिक समस्याएं: विकास और लापरवाही का संघर्ष

यह रिपोर्ट कानपुर में चल रही नागरिक समस्याओं पर प्रकाश डालती है, जिसमें शहर की महापौर, प्रमिला पांडे, के हालिया कार्यकाल पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महापौर ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीता है और हाल ही में इजरायल की यात्रा से लौटी हैं, जहां के विकास से प्रेरित होकर उन्होंने कानपुर में भी वैसा ही विकास करने की बात कही है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर की वर्तमान स्थिति इस दावे के विपरीत है। शहर में अतिक्रमण के अलावा, विकास कार्यों की कमी भी एक बड़ी समस्या है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता

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इसराइल से आने के बाद महापौर का interview ऊपर दिए हुए लिंक में देखे

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नगर निगम और स्थानीय प्रतिनिधि:

रिपोर्ट में नगर आयुक्त, सुधीर कुमार, के प्रदर्शन पर भी असंतोष व्यक्त किया गया है। उनकी रिपोर्ट कार्ड को अच्छा नहीं माना गया है, क्योंकि उन्होंने जलभराव और नाली भराव वाले क्षेत्रों का व्यक्तिगत रूप से दौरा नहीं किया है। विशेष रूप से, मकड़ी खेड़ा के अग्निहोत्री नगर क्षेत्र की दुर्दशा पर जोर दिया गया है। वहां के पार्षद पति, संजय बाथम (वार्ड 17, नारामऊ), पर अपने पांच साल के कार्यकाल में क्षेत्र का दौरा नहीं करने का आरोप है।

पिछले साल, एक स्थानीय निवासी ने अपने घर के बाहर जलभराव और नालियों की कमी को लेकर पार्षद से संपर्क किया था। उसने सड़क, पानी और सीवर लाइन के साथ-साथ नालियों के निर्माण की मांग की, जिस पर पार्षद ने यह कहकर काम कराने से इनकार कर दिया कि वह एक सोसाइटी की जमीन है और वहां काम नहीं कराया जा सकता। इस पर, निवासी ने तर्क दिया कि उस सोसाइटी में भी इंसान रहते हैं और वे ही उन्हें वोट देते हैं। इसके बावजूद, पांच साल बीत जाने पर भी कोई काम नहीं हुआ।

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स्वास्थ्य और सार्वजनिक आक्रोश:

इस उपेक्षा के कारण, क्षेत्र में पानी भर गया है, जिससे मच्छरों की संख्या में वृद्धि हुई है और डेंगू, वायरल बुखार और फंगल संक्रमण जैसी बीमारियां फैल रही हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन समस्याओं के बारे में स्थानीय विधायक, नीलिमा कटियार, को फोन पर सूचित किया गया था, लेकिन उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और कोई रुचि नहीं दिखाई। इसी तरह, सांसद, देवेंद्र सिंह भोले, को भी इन समस्याओं की जानकारी होने के बावजूद वे उदासीन रहे हैं।

अग्निहोत्री नगर और मकड़ी खेड़ा की जनता में इन समस्याओं को लेकर भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने कहा है कि अगर उनकी समस्याएं नहीं सुनी गईं, तो वे आगामी चुनाव में वोट देते समय इन सभी मुद्दों को याद रखेंगे और उसी के अनुसार मतदान करेंगे। यह रिपोर्ट कानपुर के निवासियों और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच गहरे विश्वास की कमी को दर्शाती है, जहां जनता अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है और प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं।

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