उत्तर प्रदेश में अब गिरफ्तारी और तलाशी के लिए नए नियमों का पालन करना होगा। पुलिस को अब किसी भी व्यक्ति की तलाशी लेने के लिए कम से कम दो गवाहों की जरूरत होगी। ये नियम सीआरपीसी की धारा 41 (ए) और 41 (बी) के तहत बनाए गए हैं, और इनका उद्देश्य पुलिस की कार्रवाई में पारदर्शिता लाना और दुरुपयोग को रोकना है।

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यूपी पुलिस अब सीबीआई और ईडी की तर्ज पर करेगी काम

उत्तर प्रदेश में पुलिस के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया गया है। नए डीजीपी राजीव कृष्ण के आदेश के बाद अब यूपी पुलिस केंद्रीय जांच एजेंसियों, जैसे सीबीआई और ईडी, की तरह काम करेगी। इस नई व्यवस्था का लक्ष्य पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और संवेदनशील बनाना है।

सोमवार को डीजीपी मुख्यालय से इस संबंध में सभी पुलिस कप्तानों को विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों में गिरफ्तारी और तलाशी के दौरान कुछ सख्त नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है।

क्या हैं नए नियम?

  • विस्तृत रिपोर्ट: अब हर गिरफ्तारी के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस रिपोर्ट में गिरफ्तारी का समय, स्थान, कारण, और आरोपी का बयान दर्ज किया जाएगा।
  • दो गवाह अनिवार्य: गिरफ्तारी और तलाशी के दौरान दो स्वतंत्र गवाहों का होना अब अनिवार्य है।
  • बरामद सामान और मेडिकल जांच: बरामद सामान की सूची और आरोपी की मेडिकल जांच की स्थिति भी रिपोर्ट में दर्ज की जाएगी।
  • हस्ताक्षर: इस रिपोर्ट पर गवाहों और गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के हस्ताक्षर लेना अनिवार्य होगा।

ये नए नियम पुलिस की कार्रवाई में पारदर्शिता लाएंगे और किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकने में मदद करेंगे। इस कदम को यूपी में पुलिसिंग को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

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