नई दिल्ली: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. सोमवार रात को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए दिए गए इस इस्तीफे ने सभी को चौंका दिया, खासकर तब जब उन्होंने कुछ ही दिन पहले अपने पूरे कार्यकाल तक पद पर बने रहने की बात कही थी. हालांकि, सूत्रों की मानें तो इसके पीछे सियासी वजहें अधिक गहरी हैं और सरकार की उनसे लगातार बढ़ती नाराजगी एक बड़ा कारण बताई जा रही है.


सरकार की नाराजगी के तीन प्रमुख कारण:

सूत्रों के अनुसार, जगदीप धनखड़ के कामकाज और कुछ बयानों को लेकर सरकार लगातार असहज महसूस कर रही थी. तीन मुख्य कारणों ने इस तनाव को बढ़ाया और अंततः इस्तीफे की स्थिति तक पहुंचा दिया:

  1. जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव स्वीकार करना: मॉनसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्षी सांसदों से जुड़े प्रस्ताव को सभापति धनखड़ द्वारा स्वीकार करना सरकार की नाराजगी का एक बड़ा कारण बना. सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस प्रस्ताव को लोकसभा में लाने की तैयारी कर रही थी और विपक्ष भी इस पर सहमत था. राज्यसभा में इसके अचानक स्वीकार होने से सरकार को झटका लगा और उसने इसे अपनी तैयारियों को बाधित करने वाला माना. इस घटना के बाद सरकार की तरफ से गहरी नाराजगी भी जताई गई.
  2. न्यायपालिका पर लगातार टिप्पणी: सूत्रों के अनुसार, जगदीप धनखड़ लगातार न्यायपालिका पर निशाना साध रहे थे. उनकी इस शैली से सरकार सहमत नहीं थी. सरकार का मानना था कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियों से बचना चाहिए, खासकर जब मामला न्यायपालिका से जुड़ा हो.
  3. सरकार की बैठकों से दूरी और संवाद की कमी: उपराष्ट्रपति द्वारा बुलाई गई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में भी सरकार शामिल नहीं हुई, हालांकि सरकार ने इसके पीछे दूसरी व्यस्तता का हवाला दिया. सूत्रों का कहना है कि यह घटनाक्रम भी सरकार और उपराष्ट्रपति के बीच बढ़ती दूरी का संकेत था. ऐसा माना जा रहा है कि धनखड़ की कार्यशैली को लेकर सरकार में असंतोष बढ़ रहा था, जिसके चलते अंततः यह स्थिति बनी.

इस्तीफे के बाद की सियासी प्रतिक्रियाएं:

धनखड़ के इस्तीफे के बाद से ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्ष इसे सेहत का बहाना बताते हुए गहरे राजनीतिक कारणों की ओर इशारा कर रहा है.

  • कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है. कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, “सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उपराष्ट्रपति ने इस्तीफा क्यों दिया. सरकार को कम से कम उनका धन्यवाद करना चाहिए था.” वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री के ट्वीट को “रहस्य को और बढ़ाने वाला” बताया और दावा किया कि एक “किसान पुत्र को सम्मानजनक विदाई से भी वंचित किया जा रहा है.”
  • राजद नेता तेजस्वी यादव ने तो इस्तीफे को बिहार की राजनीति से भी जोड़ दिया है. उन्होंने दावा किया कि इस इस्तीफे से भाजपा बिहार में एनडीए के नेता के रूप में जद (यू) अध्यक्ष नीतीश कुमार को बनाए रखने की मजबूरी पर पुनर्विचार करने को बाध्य होगी.

वहीं, सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधे हुए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर धनखड़ के बेहतर स्वास्थ्य की कामना की और उन्हें “किसान पुत्र और प्रेरणादायक नेता” बताया, लेकिन इस्तीफे के कारणों पर कोई टिप्पणी नहीं की.


अनसुलझे सवाल:

जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है:

  • आखिर ऐसी क्या बड़ी वजह थी कि देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे उपराष्ट्रपति को अपने कार्यकाल के बीच में ही पद छोड़ना पड़ा?
  • क्या यह अचानक का फैसला था, या इसके पीछे कोई लंबी योजना थी?
  • प्रधानमंत्री के ट्वीट के बावजूद सरकार की तरफ से कोई विस्तृत बयान न आना क्या दर्शाता है?
  • क्या यह इस्तीफा भाजपा के भीतर किसी बड़े संगठनात्मक बदलाव या भविष्य के फैसलों से जुड़ा है, जैसा कि कुछ नेता कयास लगा रहे हैं?

सोमवार सुबह संसद में ऐसी कोई हलचल नहीं थी, जिससे लगे कि उपराष्ट्रपति इस्तीफा देने वाले हैं. इन अनसुलझे सवालों के बीच, धनखड़ का इस्तीफा भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे गया है. आने वाले दिनों में ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस इस्तीफे के पीछे की असली वजह क्या है और इसका भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा.


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