एनकाउंटर में मारा गया एक लाख का इनामी बदमाश शंकर कनौजिया, जो 14 साल से फरार था, हत्याएं करने के लिए कुख्यात था। आजमगढ़ और मऊ में उस पर दस मुकदमे दर्ज थे।
अपराधों का इतिहास
- गाजर-मूली की तरह काटता था सिर: शंकर कनौजिया लोगों का सिर धड़ से अलग करने के लिए कुख्यात था और पहचान छुपाने के लिए कटे हुए सिर को अनजान जगहों पर फेंक देता था।
- पहला अपराध: उसने 16 साल की उम्र में जरायम की दुनिया में कदम रखा। उसके खिलाफ पहला केस 1999 में मऊ के दोहरीघाट थाने में मारपीट का दर्ज हुआ था।
- लूट और हत्याएं: 2001 और 2002 में उसने लूट की कई वारदातें कीं। 2011 में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर विंध्याचल पांडेय का सिर धड़ से अलग कर उनका मालवाहक लूट लिया था।
- लकड़ी व्यापारी की हत्या: उसने 14 महीने पहले एक लकड़ी व्यापारी का सिर काटकर हत्या कर दी थी।
एनकाउंटर और मौत
- एनकाउंटर: शनिवार तड़के आजमगढ़ के जहानागंज क्षेत्र के नरेहथा गांव में मगई नदी के पुल के पास पुलिस एनकाउंटर में शंकर कनौजिया मारा गया।
- शव की पहचान: मुठभेड़ में मारे जाने के बाद, उसके भाई-भाभी और गांव के कुछ लोग वकील के साथ मोर्चरी पहुंचे और शव की पहचान की।
- अंतिम संस्कार: पोस्टमार्टम के बाद, परिजन उसका शव घर ले गए।
व्यक्तिगत जीवन
- बचपन: जन्म के 6 दिन बाद ही मां की मौत हो जाने के कारण उसका पालन-पोषण उसकी मौसी ने किया था।
- अपराधी बनने का कारण: किशोरावस्था में गलत संगत में पड़ने के बाद वह अपराधी बन गया।
- जेल में दोस्ती: 12 साल पहले मऊ जेल में उसकी मुलाकात रामछवि से हुई थी, और जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर लकड़ी कटवाने का काम शुरू किया।
- अविवाहित: वह तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटा था और उसकी शादी नहीं हुई थी।





