जीएसटी में बदलाव की प्रक्रिया और विपक्ष का फॉर्मूला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्रता दिवस पर की गई घोषणा के बाद, केंद्र सरकार को जीएसटी में बड़े बदलाव करने की मंजूरी मिल गई है। राज्यों के मंत्रियों की समिति (GoM) ने 12% और 28% जीएसटी स्लैब को हटाने पर अपनी सहमति जताई है।

यह सुधार वस्तु एवं सेवा कर (GST) के तहत सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसे 1 जुलाई 2025 से लागू किया गया था। जीएसटी का लक्ष्य ‘एक देश एक कर’ की अवधारणा को बढ़ावा देना है, जिससे विभिन्न प्रकार के अप्रत्यक्ष करों जैसे वैट, एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स आदि को समाप्त किया जा सके।

जीएसटी दरों में बदलाव की प्रक्रिया क्या है?

जीएसटी दरों को बढ़ाना या घटाना एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है:

  • GoM की सिफारिशें: सबसे पहले, जीएसटी में बदलाव के लिए एक राज्यों के मंत्रियों की समिति (GoM) बनाई जाती है। यह समिति किसी भी प्रस्तावित बदलाव पर गहन विचार-विमर्श करती है और अपनी सिफारिशें तैयार करती है।
  • जीएसटी काउंसिल का फैसला: GoM की सिफारिशों को जीएसटी काउंसिल के पास भेजा जाता है। यह काउंसिल जीएसटी से संबंधित सभी मामलों पर अंतिम निर्णय लेती है।
  • मतदान: काउंसिल में किसी भी प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए 50% से अधिक मतों की आवश्यकता होती है। प्रत्येक राज्य का एक वोट होता है, जिसका प्रतिनिधित्व मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री या कोई अन्य सदस्य कर सकता है।

विपक्ष का फॉर्मूला और राजस्व नुकसान का मुद्दा

विपक्षी राज्यों ने 12% और 28% स्लैब को हटाने के बाद होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए एक फॉर्मूला मांगा है। उनका मानना है कि इन स्लैब को हटाने से राज्यों को राजस्व का बड़ा नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार को एक स्पष्ट तंत्र स्थापित करना चाहिए।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जीएसटी प्रणाली के तहत राज्यों को अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार के माध्यम से प्राप्त होता है। किसी भी स्लैब में बदलाव का सीधा असर राज्यों की वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है, खासकर उन राज्यों पर जो 28% स्लैब से अधिक राजस्व अर्जित करते हैं।


जीएसटी स्लैब और उनका वर्गीकरण

वर्तमान में जीएसटी में मुख्य रूप से चार स्लैब हैं, जिनके तहत विभिन्न वस्तुएं और सेवाएं आती हैं:

  • 5% स्लैब: इस स्लैब में आवश्यक वस्तुएं जैसे दवाइयां, कोयला, कुछ खाद्य पदार्थ, रेलवे इकोनॉमी क्लास यात्रा और रासायनिक उर्वरक शामिल हैं।
  • 12% स्लैब: इस स्लैब में फलों का जूस, आयुर्वेदिक दवाएं, प्रोसेस्ड फूड, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और सस्ते होटल जैसी वस्तुएं व सेवाएं आती हैं।
  • 18% स्लैब: यह सबसे बड़ा स्लैब है, जिसमें गैर-एसी रेस्तरां, इलेक्ट्रॉनिक्स, जूते, आईटी सेवाएं, वित्तीय सेवाएं और दूरसंचार सेवाएं शामिल हैं।
  • 28% स्लैब: यह स्लैब लक्जरी वस्तुओं जैसे कार, एयर कंडीशनर, फ्रिज, महंगे होटल और तंबाकू उत्पादों पर लागू होता है।

इनके अलावा, कुछ विशेष दरें भी हैं, जैसे सोने और कीमती पत्थरों पर 3% और छोटे उत्पादों पर 1% जीएसटी। कुछ वस्तुएं जैसे पेट्रोल, डीजल, शराब और बिजली जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।

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